माल की कीमत माँगने के लिए दो साल भी पूरी समय-सीमा हो सकती है। ताइवान का कानून लागू होने पर व्यापारी या निर्माता द्वारा दिए गए माल की कीमत का दावा नागरिक संहिता की धारा 127(8) में आता है। धारा 128 के अनुसार यह अवधि उस दिन से चलती है जब दावा किया जा सकता है, इसलिए भुगतान की सहमत तारीख सामने रखनी होगी।
ताइवान के विदेशी तत्व वाले मामलों के कानून की धारा 20 पक्षों की वैध पसंद को मानती है; स्पष्ट और वैध पसंद न होने पर सबसे निकट संबंध वाला कानून लागू होता है। धारा 36 के अनुसार दावे की समय-सीमा भी उसी कानूनी संबंध के लागू कानून से तय होती है। केवल खरीदार का ताइवान में होना पर्याप्त नहीं।
बिल किस कंपनी को देना था?
भारतीय कंपनी के purchase order, commercial invoice और shipping documents में नाम मिलाएँ। माल लेने वाला गोदाम, ऑर्डर देने वाला एजेंट और कीमत चुकाने वाली कंपनी अलग हो सकते हैं। खरीदार का पूरा पंजीकृत नाम, पहचान संख्या और पता दर्ज करें; समूह का ब्रांड नाम पर्याप्त पहचान नहीं देता।
किस बिल पर कितना बाकी है? एक हिसाब में मूल कीमत, जमा भुगतान, credit note, विवादित कटौती और बची रकम दिखाएँ। प्रत्येक राशि की मुद्रा भी लिखें। खरीदार ने गुणवत्ता या देर से डिलीवरी की शिकायत की हो तो उसे हटाकर केवल अनुकूल ईमेल चुनना आगे की तैयारी कमजोर करेगा। संस्था की पहचान के लिए सहायक कंपनी और शाखा का अंतर भी उपयोगी है।
नोटिस के बाद की छह महीने की खिड़की
भुगतान की माँग, देनदार द्वारा ऋण स्वीकार करना और मुकदमा दायर करना समय-सीमा को बाधित करने के आधार हैं। धारा 129 भुगतान आदेश माँगने, सुलह का आवेदन देने और विवाद पंचाट (arbitration) को सौंपने जैसी कार्रवाइयों को भी मुकदमे के समान प्रभाव देती है। कोई जवाब वास्तव में ऋण स्वीकार करता है या केवल बातचीत जारी रखता है, यह उसके शब्दों से जाँचना होगा। पूरा संदेश बचाएँ।
माँग भेजने का प्रभाव सशर्त है। धारा 130 के अनुसार उसके बाद छह महीने में मुकदमा न होने पर समय-सीमा की बाधा हुई ही नहीं मानी जाती। इसलिए “अगले महीने भुगतान” वाले जवाब आते रहें तो भी अगली कानूनी कार्रवाई की तारीख तय करें। बार-बार रिमाइंडर भेजना अनिश्चितकाल तक समय बढ़ाने का भरोसेमंद तरीका नहीं है।
भुगतान आदेश कब उपयोगी हो सकता है
निश्चित धनराशि के लिए अदालत से भुगतान आदेश, यानी 支付命令, माँगा जा सकता है। दावे का प्रारंभिक आधार दिखाना होता है। दीवानी प्रक्रिया संहिता की धाराएँ 508 और 511 इसकी शर्तें रखती हैं।
क्या भारत से आवेदन करने के कारण यह रास्ता बंद है? धारा 509 में ऐसी सामान्य रोक नहीं है। रोक तब है जब आपका अपना प्रतिदायित्व अधूरा हो, आदेश विदेश में तामील करना पड़े या सार्वजनिक सूचना से तामील की जरूरत हो। खरीदार का सही ताइवानी पता इसलिए निर्णायक हो सकता है।
आदेश जारी होने से भुगतान मिलने तक कई चरण हैं:
| चरण | कानूनी परिणाम |
|---|---|
| जारी होने के तीन महीने के भीतर तामील न हो | आदेश अपना प्रभाव खो देता है: धारा 515। |
| देनदार को आदेश तामील हो | वह 20 दिन में बिना कारण बताए आपत्ति कर सकता है: धारा 516। |
| समय पर वैध आपत्ति आए | आपत्ति वाले हिस्से का आदेश निष्प्रभावी होता है; आवेदन मुकदमे या सुलह के आवेदन के रूप में चलता है: धारा 519। |
वैध आपत्ति न आने पर आदेश जबरन वसूली का आधार बन सकता है। देनदार आदेश में दर्ज दावा मौजूद न होने की न्यायिक घोषणा के लिए मुकदमा दायर कर सकता है। उसके आवेदन पर अदालत उपयुक्त और सुनिश्चित सुरक्षा देने की शर्त पर जबरन वसूली रोक सकती है (धारा 521)।
संपत्ति का सवाल मुकदमे से पहले भी उठता है
खरीदार की संपत्ति हटाए जाने के ठोस संकेत हों तो अस्थायी कुर्की पर सलाह लें। धारा 523 भविष्य में वसूली असंभव या बहुत कठिन होने के जोखिम की माँग करती है। धारा 526 में दावा और कुर्की का कारण प्रारंभिक रूप से दिखाना आवश्यक है; अदालत सुरक्षा राशि भी माँग सकती है। केवल बिल का देर से भुगतान होना अपने-आप कुर्की का आदेश नहीं दिलाता।
पुराने भुगतान का बैंक रिकॉर्ड बचाएँ। माल रखने की जगह और खरीदार को मिलने वाली रकम के ज्ञात स्रोत अपने सलाहकार के लिए अलग सूची में रखें। अनुमान को तथ्य की तरह न लिखें। भारत में निर्यात प्राप्तियों, बैंक रिपोर्टिंग या किसी भारतीय कार्यवाही पर भारतीय सलाह अलग लगेगी; यहाँ उनका निर्णय नहीं किया गया है।
ताइवान पक्ष की जाँच के लिए संपर्क पृष्ठ पर दिए wei@hoveringlaw.com.tw को गैर-गोपनीय सार, दूसरे पक्ष का नाम, ताइवान से संबंध और निकटतम तारीख लिखें। पहले बातचीत की व्यवस्था तय करें: उपलब्ध परामर्श भाषाएँ अंग्रेज़ी, चीनी, जापानी और कोरियाई हैं; हिंदी में सेवा की पुष्टि नहीं है। शुरुआती ईमेल में पूरे संवेदनशील दस्तावेज़ आवश्यक नहीं, और उससे वकालत का संबंध अपने-आप नहीं बनता। समीक्षा के लिए भुगतान की नियत तारीख और आखिरी माँग की तारीख अलग-अलग तैयार रखें।
आधिकारिक स्रोत और सीमा
- नागरिक संहिता: 127, 128, 129, 130।
- विदेशी तत्व वाले दीवानी मामलों में लागू कानून: धारा 20 और पूर्ण पाठ में धारा 36।
- दीवानी प्रक्रिया संहिता: 508, 509, 511, 515, 516, 519, 521, 523, 526।
स्रोत जाँच: 23 अक्टूबर 2026। यह ताइवान कानून की सामान्य जानकारी है; किसी भारतीय निर्यात अनुबंध पर लागू कानून, अदालत या वसूली की संभावना का व्यक्तिगत निष्कर्ष नहीं।
सामान्य प्रश्न
- क्या ताइवान के खरीदार के हर बकाया बिल की समय-सीमा दो साल है?
- नहीं। पहले लागू कानून तय होता है। ताइवान का कानून लागू होने पर नागरिक संहिता की धारा 127(8) व्यापारियों और निर्माताओं आदि द्वारा दिए गए माल की कीमत के लिए दो साल की अवधि रखती है। इसकी शुरुआत दावा करने का अधिकार उपलब्ध होने से होती है; हर सेवा, ऋण या क्षतिपूर्ति का दावा इसी अवधि में नहीं आता।
- क्या कानूनी नोटिस भेजकर इंतज़ार किया जा सकता है?
- भुगतान की माँग से समय-सीमा का चलना बाधित हो सकता है, लेकिन धारा 130 के अनुसार उसके बाद छह महीने में मुकदमा न होने पर वह बाधा हुई ही नहीं मानी जाती। धारा 129 भुगतान आदेश या सुलह का आवेदन और विवाद पंचाट को सौंपने जैसी कुछ कार्रवाइयों को मुकदमे के समान प्रभाव देती है। अगला रिमाइंडर सुरक्षित विकल्प मानकर न चलें।
- क्या भारत में रहने वाला सप्लायर ताइवान में भुगतान आदेश माँग सकता है?
- विदेश में होना अपने-आप रोक नहीं है। लेकिन सप्लायर का अपना प्रतिदायित्व बाकी हो, आदेश विदेश में तामील करना पड़े या सार्वजनिक सूचना से तामील की जरूरत हो, तो यह प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है। खरीदार की समय पर आपत्ति आने पर मामला मुकदमे या सुलह की प्रक्रिया में जा सकता है।
This article provides general information and is not legal advice on any individual matter.



