अंतिम तकनीकी रिपोर्ट अभी नहीं आई; क्या ताइवानी विक्रेता को खराबी की सूचना रोकनी चाहिए? ताइवान के बिक्री नियम लागू हों तो नागरिक संहिता की धारा 356 प्राप्त माल का उसकी प्रकृति के अनुसार शीघ्र सामान्य निरीक्षण और विक्रेता की जिम्मेदारी वाला दोष मिलने पर तत्काल सूचना माँगती है। कारखाने की अंदरूनी शिकायत उस सूचना की जगह नहीं लेती।
भारतीय खरीदार का purchase order, हस्ताक्षरित अनुबंध और उसमें शामिल शर्तें साथ पढ़नी होंगी। लागू कानून की धारा 20 के अनुसार ताइवानी विक्रेता होने भर से ताइवान कानून तय नहीं होता। यहाँ उसी कानून के अधीन माल की बिक्री की चर्चा है; डिजाइन, स्थापना और तय उत्पादन परिणाम का संयुक्त करार अलग कानूनी जाँच माँग सकता है। भारत के आयात, सुरक्षा और कर संबंधी नियम इस लेख में तय नहीं किए गए हैं।
पहली सूचना में देखे गए तथ्य पर्याप्त स्पष्ट हों
मशीन का serial number और ऑर्डर लिखें। डिलीवरी और विफल परीक्षण की तारीख भी दें। सहमत output, tolerance या speed के सामने वास्तविक माप रखें। किस material, setting और बिजली आपूर्ति पर टेस्ट किया गया था? कारण अनिश्चित है तो वैसा ही लिखें। सूचना में वास्तविक खराबी बताएँ। अनुमानित डिजाइन दोष को सिद्ध तथ्य न बनाएँ।
अनुबंध के notice clause में दिए प्राप्तकर्ता और तरीके का उपयोग करें। भेजा गया ईमेल, उसके attachments और प्राप्ति का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। पूरी ईमेल शृंखला बचाएँ। भारतीय डीलर से बात हुई हो तो यह भी देखें कि अनुबंध में विक्रेता कौन है। ताइवान की फैक्टरी के इंजीनियर को फोटो भेजने से हर बार सही कानूनी पक्ष तक सूचना पहुँचना साबित नहीं होता। ताइवान व्यापार संरचना वाला लेख बिक्री और तकनीकी सहायता अलग संस्थाओं के पास होने का फर्क समझाता है।
निरीक्षण के लिए धारा 356 सभी खरीदारों को तय सात या तीस दिन नहीं देती। सामान्य निरीक्षण से न मिल सकने वाला दोष बाद में दिखे तो उसकी खोज पर भी तत्काल सूचना देनी होती है। आवश्यक सूचना में चूक से माल स्वीकार किया हुआ माना जा सकता है। जानबूझकर दोष छिपाने वाले विक्रेता पर धारा 357 यह नियम लागू नहीं करती; केवल रिपोर्ट पर असहमति से जानबूझकर छिपाना सिद्ध नहीं होता।
डिलीवरी, शिपिंग और कमीशनिंग के रिकॉर्ड
बंदरगाह पहुँचने, कारखाने में उतरने, installation और commissioning की तारीखों को एक तारीख में न मिलाएँ। पैकिंग की तस्वीरें, पहले start-up का वीडियो, error logs और स्वीकार्यता परीक्षण की signed sheet अलग रखें। इससे समझ आएगा कि कमी कब दिखाई दी और उसके बाद मशीन में क्या बदला।
धारा 354 में विक्रेता की जिम्मेदारी उस समय की स्थिति से जुड़ी है जब जोखिम खरीदार को जाता है। मूल्य, सामान्य उपयोग या सहमत उपयोग को प्रभावित करने वाले दोष धारा 354 के पहले अनुच्छेद में आते हैं; मूल्य या उपयोग में नगण्य कमी को उसमें दोष नहीं माना जाता। उसी धारा के दूसरे अनुच्छेद के अनुसार, जोखिम हस्तांतरित होते समय वह गुणवत्ता भी मौजूद होनी चाहिए जिसकी विक्रेता ने गारंटी दी थी। बाद में मशीन रुकने से अकेले उसका मूल कारण तय नहीं होता।
दूर से भेजी वस्तु दोष के कारण अस्वीकार की जाए और प्राप्ति स्थान पर विक्रेता का एजेंट न हो, तो धारा 358 खरीदार पर अस्थायी सुरक्षित रख-रखाव की जिम्मेदारी डालती है। उचित तरीके से दोष का तत्काल प्रमाण न लेने पर प्राप्ति के समय वस्तु दोषरहित मानी जाने की धारणा बनती है। पुर्जा फेंकने या बदलने से पहले उसकी पहचान, हालत और जाँच दर्ज करें। सुरक्षा जरूरी है। खतरनाक मशीन चालू रखकर प्रमाण बनाने की कोशिश न करें।
मरम्मत की बातचीत में कानूनी उपाय खो न जाए
क्या आपको कीमत घटवानी है, खरीद रद्द करनी है या चालू मशीन चाहिए? तकनीकी टीम और खरीद विभाग का उत्तर अलग हो सकता है। विक्रेता को भेजी अगली बात में कौन-सा परिणाम माँगा जा रहा है, उसे अधिकृत व्यक्ति स्पष्ट करे।
दोष की वैधानिक जिम्मेदारी होने पर धारा 359 अनुबंध रद्द करने या कीमत घटाने का उपाय देती है। परिस्थितियों में रद्द करना स्पष्ट रूप से अनुचित हो तो इस धारा के तहत केवल कीमत घटाई जा सकती है। धारा 364 में दोषरहित प्रतिस्थापन केवल प्रकार से निर्धारित माल के लिए है; हर custom-built मशीन पर नई मशीन का अधिकार मानना ठीक नहीं।
गारंटी की गई गुणवत्ता न मिले या विक्रेता ने जानबूझकर दोष न बताया हो तो धारा 360 में हर्जाने का आधार है। उत्पादन बंद होने, भारतीय ग्राहक के दावे और स्थानीय मरम्मत का पूरा खर्च स्वतः मंजूर नहीं हो जाता। नुकसान का प्रमाण, कारण और अनुबंध की शर्तें भी जाँचनी होंगी।
दो घड़ियाँ: पहली सूचना और अधिकार का प्रयोग
धारा 365 के तहत दोष के कारण खरीद रद्द करने या कीमत घटाने का अधिकार सूचना के बाद छह महीने तक इस्तेमाल न होने पर समाप्त होता है। डिलीवरी से पाँच साल गुजरना भी सीमा है; देर से मिले दोष में यह तारीख पहले आ सकती है। जानबूझकर दोष न बताने पर छह महीने वाला नियम हटता है, पाँच साल वाला नहीं। यह हर प्रकार के हर्जाने की साझा समय-सीमा नहीं है।
खराबी बताना और खरीद रद्द करना अलग कदम हैं। धारा 258 के अनुसार रद्द करने का अधिकार दूसरे पक्ष को अपनी इच्छा बताकर प्रयोग होता है। विक्रेता धारा 361 के तहत उचित अवधि में रद्द करने का निर्णय माँग सकता है; उस अवधि में अधिकार इस्तेमाल न किया जाए तो वह खो जाता है। मरम्मत का प्रस्ताव आने को समय-सीमा रुकी हुई न मानें।
ताइवान पक्ष से संपर्क के लिए wei@hoveringlaw.com.tw को छोटा गैर-गोपनीय सार, विक्रेता का नाम और डिलीवरी, खोज तथा पहली सूचना की तारीखें लिखी जा सकती हैं। बातचीत की व्यवस्था पहले पूछें; परामर्श अंग्रेज़ी, चीनी, जापानी और कोरियाई में उपलब्ध है, हिंदी की पुष्टि नहीं है। संवेदनशील तकनीकी फाइलें भेजने और काम सौंपने की शर्तें बाद में तय होंगी। अभी के लिए परीक्षण में बदले गए पुर्जों की सूची बचाएँ।
आधिकारिक स्रोत
- लागू कानून: विदेशी तत्व वाले दीवानी मामलों के कानून की धारा 20।
- नागरिक संहिता: 258, 354, 356, 357, 358, 359, 360, 361, 364, 365।
आधिकारिक पाठ 23 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। यह सामान्य कानूनी जानकारी किसी मशीन की खराबी, तकनीकी कारण या आपके अनुबंध पर लागू कानून का निर्णय नहीं करती।
सामान्य प्रश्न
- क्या विक्रेता को बताने से पहले अंतिम टेस्ट रिपोर्ट चाहिए?
- ताइवान के बिक्री नियम लागू हों तो प्राप्त माल का शीघ्र सामान्य निरीक्षण और विक्रेता की जिम्मेदारी वाला दोष मिलने पर तत्काल सूचना आवश्यक है। प्रारंभिक सूचना में सामने आए तथ्य, प्रभावित मशीन और तारीखें बताएँ; अनिश्चित कारण को निश्चित निष्कर्ष न बनाएँ।
- क्या सूचना देने के बाद छह महीने तक कोई कदम जरूरी नहीं?
- नहीं। पहली सूचना तत्काल देनी होती है। धारा 365 की छह महीने की अवधि उस सूचना के बाद दोष के आधार पर अनुबंध रद्द करने या कीमत घटाने के अधिकार के प्रयोग से जुड़ी है। डिलीवरी से पाँच साल की अलग सीमा भी है। विक्रेता की उचित अवधि वाली माँग से रद्द करने का निर्णय पहले भी जरूरी हो सकता है।
- क्या हर खराब मशीन की जगह नई मशीन माँगी जा सकती है?
- धारा 364 का प्रतिस्थापन अधिकार उस माल के लिए है जिसे केवल प्रकार से तय किया गया हो। हर विशेष रूप से बनाई गई मशीन पर इसे लागू नहीं मान सकते। अनुबंध, बिक्री की कानूनी प्रकृति और उपलब्ध उपाय अलग जाँचे जाते हैं।
This article provides general information and is not legal advice on any individual matter.



