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ताइवान से तकनीकी सेवा का भुगतान: भारतीय कंपनी के लिए 10% कर सीमा की शर्तें

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काल्पनिक दृश्य

इंजीनियरिंग सलाह, सॉफ़्टवेयर का लाइसेंस और परियोजना के लिए कर्मचारियों की सेवाएँ एक अनुबंध में हों, तो ताइवान से मिलने वाले भुगतान के हिस्सों को अलग-अलग जाँचना होगा। ताइवान के कर समझौते लागू करने संबंधी नियमों की धारा 20 में मिली-जुली आय को उसके वास्तविक स्वरूप के अनुसार बाँटकर संबंधित प्रावधान लगाने की व्यवस्था है।

भारत–ताइवान के कर समझौते के अनुच्छेद 12 की शर्तें पूरी होने पर ताइवान में लगने वाला कर सकल तकनीकी सेवा शुल्क के 10% से अधिक नहीं होगा। इससे हर बिल पर उतना कर लगना जरूरी नहीं हो जाता।

किस काम को तकनीकी सेवा माना गया है

अनुच्छेद 12(3)(b) प्रबंधकीय, तकनीकी और परामर्श सेवाओं के भुगतान को शामिल करता है। इसमें तकनीकी या अन्य कर्मचारियों की सेवाएँ उपलब्ध कराना भी आता है। स्वतंत्र पेशेवर सेवाओं या नौकरी के जिन भुगतानों पर अनुच्छेद 14 या 15 लागू होते हैं, वे इस परिभाषा से बाहर हैं। इसलिए सेवा देने वाली कंपनी और उसके कर्मचारी का वेतन एक ही आय-श्रेणी मानना गलत होगा।

सॉफ़्टवेयर या तकनीक से जुड़े अनुबंध में यह भी देखना होगा कि ग्राहक को केवल काम का नतीजा मिलता है या कोई बौद्धिक संपदा इस्तेमाल करने का अधिकार भी। रॉयल्टी की परिभाषा अनुच्छेद 12(3)(a) में है। अनुबंध का नाम बदलने से काम नहीं बदलता। scope of work, दिए गए अधिकार और हर हिस्से की कीमत वर्गीकरण का आधार तैयार करते हैं।

केवल ताइवान में दफ़्तर न होने से तकनीकी सेवा शुल्क करमुक्त नहीं हो जाता। अनुच्छेद 12(5) में भुगतानकर्ता का निवास आय का स्रोत तय करने का सामान्य आधार है; देनदारी से जुड़े और उसका भार उठाने वाले स्थायी प्रतिष्ठान या निश्चित आधार के लिए अपवाद भी हैं। भारत से दूरस्थ रूप से किए गए काम में भी इस प्रावधान को देखना होगा।

निवासी और आय का वास्तविक लाभार्थी

अनुच्छेद 12(2) की सीमा के लिए शुल्क का beneficial owner समझौते के अनुसार भारत का निवासी होना चाहिए। बैंक खाते में रकम आने से अकेले यह प्रश्न हल नहीं होता। ताइवान के वर्तमान नियमों की धारा 25 भुगतान पाने वाले से कर-निवास और उस आय के beneficial owner होने, दोनों का प्रमाण माँगती है।

पात्रता की जाँच में भुगतान की पूरी व्यवस्था रखें। दूसरी समूह कंपनी को रकम आगे भेजनी हो या अनुबंध किसी और संस्था ने किया हो, तो उस संबंध को छिपाए बिना समझाना होगा। यहाँ “भारतीय कंपनी” का मतलब केवल भारत में पंजीकरण का कागज़ रखने वाली संस्था मान लेना पर्याप्त नहीं है; समझौते के निवासी होने की कसौटी लागू होती है।

घरेलू कानून अधिक लाभकारी हो तो समझौते के प्रोटोकॉल का पहला प्रावधान उतनी सीमा तक उसका लाभ बनाए रखता है। दूसरी ओर, अनुच्छेद 28 में समझौते के लाभ पाना मुख्य उद्देश्य या मुख्य उद्देश्यों में से एक होने पर लाभ से वंचित करने का नियम है। वास्तविक कारोबार न करने वाली कानूनी संस्थाएँ भी उसके दायरे में आती हैं।

ताइवान के कारोबार से जुड़ा भुगतान

भारतीय प्राप्तकर्ता ताइवान के स्थायी प्रतिष्ठान, यानी permanent establishment, के जरिए कारोबार करता हो, या वहाँ के निश्चित आधार से स्वतंत्र पेशेवर सेवाएँ देता हो, और भुगतान से संबंधित अधिकार या संपत्ति उसी से प्रभावी रूप से जुड़ी हो, तो अनुच्छेद 12(4) लागू होता है। उस स्थिति में अनुच्छेद 7 या 14 के अनुसार कर तय होगा। 10% सीमा का सामान्य रास्ता वहाँ लागू नहीं होता।

स्थानीय जगह का उपयोग, सेवा देने वाले लोगों की गतिविधियाँ और अनुबंध किसके लिए निभाया गया, इनका रिकॉर्ड रखें; केवल कंपनी की शाखा पंजीकृत है या नहीं, इसी उत्तर पर जाँच समाप्त न करें।

संबंधित पक्षों के बीच तय शुल्क पर एक और सीमा है। विशेष संबंध के कारण भुगतान स्वतंत्र पक्षों के बीच तय होने वाली राशि से अधिक हो, तो अनुच्छेद 12(6) अतिरिक्त हिस्से को इस अनुच्छेद का लाभ नहीं देता। उस हिस्से पर संबंधित घरेलू कानून और समझौते के बाकी प्रावधान देखे जाएँगे।

भुगतान से पहले उपलब्ध रहने वाले प्रमाण

ताइवान के भुगतानकर्ता को शर्तें पूरी होने पर भुगतान के समय समझौते की सीमा के अनुसार कर काटने की व्यवस्था धारा 25 देती है। इस मार्ग में ताइवान में स्थायी प्रतिष्ठान या निश्चित आधार न होने, अथवा संबंधित अधिकारों का उससे वास्तविक संबंध न होने की शर्त भी है।

प्राप्तकर्ता को भारतीय कर प्राधिकारी का निवास प्रमाणपत्र और beneficial ownership का प्रमाण देना होता है। तकनीकी सेवा अनुबंध में चीनी अनुवाद भी चाहिए। शुल्क की गणना साथ लगेगी। भुगतानकर्ता अपनी कटौती की रिपोर्ट में समझौते का लागू अनुच्छेद बताएगा और प्राप्त प्रमाण तथा गणना के दस्तावेज़ जोड़ेगा।

बिल भेजने से पहले ग्राहक से प्रस्तावित कटौती का हिसाब लेना उपयोगी है। किस राशि पर कर निकाला गया? भुगतान के बाद कर-कटौती का प्रमाण कौन भेजेगा? अनुबंध में मिलने वाली शुद्ध रकम तय हो, तो कर का भार कौन उठाएगा, इस पर भी स्पष्ट सहमति चाहिए। भारत में कर-क्रेडिट या रिटर्न का दावा भारतीय नियमों से अलग जाँचना होगा।

ताइवान में अनुबंध और कर-वर्गीकरण की शुरुआती जाँच के लिए wei@hoveringlaw.com.tw पर काम का प्रकार, भुगतानकर्ता और प्रस्तावित कटौती का गैर-गोपनीय सार भेजा जा सकता है। परामर्श की भाषाएँ अंग्रेज़ी, चीनी, जापानी और कोरियाई हैं; हिंदी में संचार की व्यवस्था पहले पुष्ट करनी होगी। केवल ईमेल भेजने से प्रतिनिधित्व स्वीकार नहीं होता। चर्चा के लिए अनुबंध की कीमत, कर की गणना और खाते में मिलने वाली रकम को अलग पंक्तियों में रखें।

आधिकारिक स्रोत और दायरा

स्रोत जाँच: 25 अक्टूबर 2026। यह ताइवान में भुगतान के कर-वर्गीकरण की सामान्य जानकारी है। किसी खास सेवा को करमुक्त मानने, कटौती की अंतिम दर तय करने या भारतीय कर रिटर्न भरने की व्यक्तिगत राय नहीं है।

सामान्य प्रश्न

क्या भारत से दी गई हर तकनीकी सेवा पर ताइवान में 10% कर लगेगा?
नहीं। अनुच्छेद 12 के दायरे, स्रोत और पात्रता की शर्तें पूरी होने पर यह सकल शुल्क पर अधिकतम कर की सीमा है। प्राप्तकर्ता उसका beneficial owner और समझौते के अनुसार भारत का निवासी होना चाहिए। ताइवान के स्थायी प्रतिष्ठान या निश्चित आधार से प्रभावी संबंध होने पर अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं।
भारतीय कंपनी को ताइवानी भुगतानकर्ता के पास कौन-से प्रमाण भेजने होंगे?
लागू शर्तों के अनुसार भारतीय कर प्राधिकारी का निवास प्रमाणपत्र और आय के beneficial owner होने का प्रमाण चाहिए। ताइवान के नियम तकनीकी सेवा अनुबंध, उसके चीनी अनुवाद और शुल्क की गणना के दस्तावेज़ भी माँगते हैं।

This article provides general information and is not legal advice on any individual matter.